कक्षा 7 – हिंदी
हिंदी भाषा, व्याकरण, साहित्य और लेखन कौशल के 30 क्रमबद्ध विषय। इस पाठ्य-सामग्री में ध्वनि परिवर्तन, शब्दों की व्युत्पत्ति, पारिभाषिक शब्दावली, वाच्य, पद-परिचय, पदबंध, उपवाक्य, अलंकार, साहित्यिक विश्लेषण तथा साक्षात्कार, रिपोर्ट, विज्ञापन और आत्मकथात्मक लेखन शामिल हैं।
🔤 ध्वनि, शब्द और अर्थ
ध्वनि परिवर्तन की अवधारणा
भाषा के प्रयोग और विकास में कभी-कभी शब्दों की ध्वनियों में परिवर्तन दिखाई देता है। किसी ध्वनि का रूप बदलना, जुड़ना, लुप्त होना या दूसरी ध्वनि से प्रभावित होना ध्वनि परिवर्तन के अध्ययन का हिस्सा है।
समय के साथ किसी शब्द का उच्चारण उसके पुराने रूप से थोड़ा भिन्न हो सकता है। बोलियों में भी एक ही शब्द के उच्चारण में अंतर देखा जा सकता है।
अपने क्षेत्र की बोली और मानक हिंदी में अलग उच्चारण वाले तीन शब्द खोजिए।
ध्वनि परिवर्तन भाषा-विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया हो सकती है। हर उच्चारण-अंतर को त्रुटि मानना उचित नहीं है।
शब्दों की व्युत्पत्ति समझना
व्युत्पत्ति किसी शब्द की उत्पत्ति, उसके पुराने रूप और समय के साथ हुए उसके विकास का अध्ययन है। इससे हमें पता चलता है कि शब्द भाषा में कहाँ से और किस प्रकार आया।
कुछ हिंदी शब्द संस्कृत से विकसित हुए हैं, कुछ क्षेत्रीय भाषाओं से आए हैं और कुछ अन्य भाषाओं से ग्रहण किए गए हैं।
विद्यालय, पुस्तक और बाज़ार जैसे शब्दों में से किसी दो की उत्पत्ति विश्वसनीय शब्दकोश में खोजिए।
शब्द की वर्तमान वर्तनी देखकर उसकी उत्पत्ति का अनुमान हमेशा सही नहीं होता। शब्दकोश उपयोगी स्रोत है।
विदेशी भाषाओं से आए हिंदी शब्द
हिंदी ने ऐतिहासिक और सामाजिक संपर्क के कारण अनेक भाषाओं से शब्द ग्रहण किए हैं। अरबी, फ़ारसी, तुर्की, पुर्तगाली और अंग्रेज़ी सहित कई भाषाओं के शब्द हिंदी में प्रचलित हैं।
अंग्रेज़ी से — स्कूल, टिकट, डॉक्टर
फ़ारसी से — बाज़ार जैसे कई प्रचलित शब्द हिंदी का हिस्सा बन चुके हैं।
दैनिक जीवन में प्रयुक्त दस ऐसे हिंदी शब्दों की सूची बनाइए जो दूसरी भाषाओं से आए हैं।
दूसरी भाषाओं से शब्द ग्रहण करना भाषा-संपर्क की सामान्य प्रक्रिया है।
पारिभाषिक शब्दावली की पहचान
किसी विशेष विषय, विज्ञान, कला या कार्यक्षेत्र में निश्चित अर्थ में प्रयुक्त शब्दों को पारिभाषिक शब्दावली कहा जाता है।
गणित — परिमाप, कोण, गुणांक
विज्ञान — कोशिका, ऊर्जा, गुरुत्व
व्याकरण — संज्ञा, सर्वनाम, उपवाक्य
कंप्यूटर विज्ञान से संबंधित पाँच पारिभाषिक शब्द लिखिए।
पारिभाषिक शब्द का अर्थ सामान्य बोलचाल के अर्थ से अधिक विशिष्ट हो सकता है।
शब्दों के संदर्भगत अर्थ
एक ही शब्द का अर्थ अलग-अलग वाक्यों या परिस्थितियों में बदल सकता है। संदर्भ के आधार पर प्राप्त होने वाले अर्थ को संदर्भगत अर्थ कहा जाता है।
“पेड़ का फल मीठा है।”
“मेहनत का फल अच्छा मिला।”
पहले वाक्य में फल वस्तु है, जबकि दूसरे में परिणाम का अर्थ देता है।
“हार” शब्द का दो अलग अर्थों में प्रयोग करते हुए वाक्य लिखिए।
किसी शब्द का सही अर्थ समझने के लिए पूरे वाक्य और परिस्थिति को पढ़ना आवश्यक है।
शब्दों के भावात्मक अर्थ
शब्द केवल शब्दकोशीय अर्थ ही नहीं देते; वे सम्मान, प्रेम, व्यंग्य, अपनापन, क्रोध या अन्य भाव भी व्यक्त कर सकते हैं। इसे शब्द का भावात्मक पक्ष कहा जा सकता है।
“घर” केवल रहने के स्थान को नहीं, संदर्भ के अनुसार अपनापन और सुरक्षा की भावना को भी व्यक्त कर सकता है।
“माँ”, “मातृभूमि” और “बचपन” शब्दों से जुड़ी भावनाएँ लिखिए।
भावात्मक अर्थ व्यक्ति, संस्कृति और संदर्भ के अनुसार अलग हो सकता है।
⚙️ वाच्य और क्रिया-संरचना
कर्तृवाच्य की पहचान
जिस वाक्य में क्रिया का प्रमुख संबंध कर्ता से होता है और कर्ता की प्रधानता रहती है, उसे कर्तृवाच्य कहा जाता है।
सीमा पत्र लिखती है।
विद्यार्थी कविता पढ़ रहे हैं।
“मोहन पुस्तक पढ़ता है।” वाक्य में कर्ता और क्रिया पहचानिए।
कर्तृवाच्य में ध्यान मुख्य रूप से कार्य करने वाले कर्ता पर रहता है।
कर्मवाच्य की पहचान
जिस वाक्य में कर्म की प्रधानता हो और क्रिया का रूप कर्म के अनुसार प्रस्तुत किया जाए, उसे कर्मवाच्य कहा जाता है।
कर्तृवाच्य — रीना ने पत्र लिखा।
कर्मवाच्य — पत्र रीना द्वारा लिखा गया।
“शिक्षक ने पाठ समझाया।” को कर्मवाच्य में बदलने का प्रयास कीजिए।
हर वाक्य का कर्मवाच्य में रूपांतरण स्वाभाविक या समान रूप से उपयोगी नहीं होता।
भाववाच्य की पहचान
भाववाच्य में कर्ता या कर्म की अपेक्षा क्रिया के भाव या कार्य की स्थिति की प्रधानता होती है।
मुझसे अब चला नहीं जाता।
उससे इतना पढ़ा नहीं जाता।
ऐसा एक वाक्य लिखिए जिसमें किसी कार्य को करने की असमर्थता का भाव व्यक्त हो।
भाववाच्य को पहचानते समय देखें कि वाक्य में कार्य करने वाले से अधिक क्रिया-भाव पर बल है या नहीं।
वाच्य परिवर्तन
वाक्य के मूल अर्थ को यथासंभव सुरक्षित रखते हुए उसकी रचना को एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलना वाच्य परिवर्तन कहलाता है।
राम ने कहानी लिखी।
→ कहानी राम द्वारा लिखी गई।
“छात्रों ने पेड़ लगाए।” को कर्मवाच्य में बदलिए।
वाच्य बदलने पर वाक्य का केंद्र बदल सकता है, लेकिन मूल घटना या आशय सुरक्षित रहना चाहिए।
🧩 पद, पद-परिचय और पदबंध
पद और शब्द में अंतर
स्वतंत्र रूप में भाषा की अर्थपूर्ण इकाई को शब्द कहा जाता है। जब वही शब्द किसी वाक्य में व्याकरणिक संबंध के साथ प्रयुक्त होता है, तो उसे पद के रूप में समझा जाता है।
“लड़का” एक शब्द है।
“लड़का मैदान में दौड़ता है।” में “लड़का” वाक्य का एक पद है।
“सुंदर फूल बगीचे में खिले हैं।” में प्रत्येक पद पहचानिए।
पद का व्याकरणिक कार्य वाक्य के संदर्भ में निर्धारित होता है।
पद-परिचय की अवधारणा
वाक्य में प्रयुक्त किसी पद का व्याकरणिक परिचय देना पद-परिचय कहलाता है। इसमें शब्द-भेद और संदर्भ के अनुसार उसकी आवश्यक व्याकरणिक विशेषताएँ बताई जाती हैं।
“सीमा सुंदर चित्र बनाती है।”
सुंदर — गुणवाचक विशेषण; “चित्र” की विशेषता बताता है।
“रवि धीरे चलता है।” में “रवि” और “धीरे” का पद-परिचय दीजिए।
पद-परिचय देते समय शब्द को अकेले नहीं, वाक्य में उसके प्रयोग के आधार पर देखें।
संज्ञा पदबंध की पहचान
शब्दों का ऐसा समूह जिसका मुख्य पद संज्ञा हो और जो वाक्य में संज्ञा जैसा कार्य करे, संज्ञा पदबंध कहलाता है।
नीली कमीज़ वाला लड़का मेरा मित्र है।
संज्ञा पदबंध पहचानिए:
“बगीचे में खेल रहे छोटे बच्चे घर चले गए।”
पूरे पदबंध का मुख्य केंद्र संज्ञा होती है।
विशेषण पदबंध की पहचान
शब्दों का ऐसा समूह जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है और विशेषण जैसा कार्य करता है, विशेषण पदबंध कहलाता है।
बहुत अधिक मेहनती विद्यार्थी सफल हुआ।
विशेषण पदबंध पहचानिए:
“अत्यंत सुंदर और आकर्षक चित्र दीवार पर लगा है।”
देखें कि शब्दों का समूह किस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बता रहा है।
क्रिया पदबंध की पहचान
जब मुख्य क्रिया के साथ सहायक क्रियाएँ या अन्य क्रियात्मक तत्व मिलकर एक क्रियात्मक इकाई बनाते हैं, तो उसे क्रिया पदबंध के रूप में समझा जा सकता है।
वह पुस्तक पढ़ रहा है।
वे काम पूरा कर चुके हैं।
क्रिया पदबंध पहचानिए:
“विद्यार्थी मैदान में खेल रहे थे।”
क्रिया पदबंध वाक्य में कार्य, अवस्था, काल या पक्ष की जानकारी दे सकता है।
क्रिया-विशेषण पदबंध की पहचान
शब्दों का ऐसा समूह जो क्रिया के समय, स्थान, ढंग, मात्रा या अन्य परिस्थिति की जानकारी देता है, क्रिया-विशेषण पदबंध कहलाता है।
वह बहुत धीरे-धीरे चल रहा था।
हम सुबह बहुत जल्दी निकले।
क्रिया-विशेषण पदबंध पहचानिए:
“खिलाड़ी अत्यंत तेजी से दौड़ा।”
पूछें—कार्य कब, कहाँ, कैसे या कितनी मात्रा में हुआ?
🔗 उपवाक्य और वाक्य-संरचना
प्रधान उपवाक्य की पहचान
मिश्र वाक्य में जो उपवाक्य मुख्य अर्थ देता है और दूसरे आश्रित उपवाक्य पर निर्भर नहीं होता, उसे प्रधान उपवाक्य कहा जाता है।
“जब वर्षा रुकी, हम बाहर गए।”
यहाँ “हम बाहर गए” प्रधान उपवाक्य है।
प्रधान उपवाक्य पहचानिए:
“यदि तुम मेहनत करोगे, तो तुम सफल होगे।”
प्रधान उपवाक्य वाक्य के केंद्रीय कथन को व्यक्त करता है।
आश्रित उपवाक्य की पहचान
जो उपवाक्य अपना पूरा अर्थ व्यक्त करने के लिए प्रधान उपवाक्य पर निर्भर रहता है, उसे आश्रित उपवाक्य कहा जाता है।
जब वर्षा रुकी, हम बाहर गए।
“जब वर्षा रुकी” आश्रित उपवाक्य है।
आश्रित उपवाक्य पहचानिए:
“मैं जानता हूँ कि वह आएगा।”
कि, जब, यदि, क्योंकि, जो आदि शब्द कई वाक्यों में आश्रित उपवाक्य की पहचान में सहायता कर सकते हैं।
उद्देश्य और विधेय का विश्लेषण
वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, वह उद्देश्य कहलाता है। उद्देश्य के बारे में जो बात कही जाती है, वह विधेय कहलाती है।
मेहनती विद्यार्थी / परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
उद्देश्य — मेहनती विद्यार्थी
विधेय — परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
उद्देश्य और विधेय अलग कीजिए:
“बगीचे के सुंदर फूल हवा में झूम रहे हैं।”
उद्देश्य केवल एक शब्द नहीं; वह कई शब्दों का समूह भी हो सकता है।
वाक्य संश्लेषण
दो या अधिक छोटे वाक्यों को उनके अर्थ और संबंध के अनुसार एक सुव्यवस्थित वाक्य में मिलाना वाक्य संश्लेषण कहलाता है।
रवि मेहनती है। रवि सफल हुआ।
→ रवि मेहनती था, इसलिए वह सफल हुआ।
संश्लेषण कीजिए:
“सूरज डूबा। अँधेरा होने लगा। हम घर लौटे।”
वाक्य जोड़ते समय विचारों के वास्तविक संबंध को स्पष्ट रखें।
✨ अलंकार और काव्य-भाषा
उपमा अलंकार की पहचान
जहाँ किसी व्यक्ति, वस्तु या गुण की तुलना किसी दूसरी वस्तु से समानता के आधार पर की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
उसका मुख चाँद के समान सुंदर है।
वह शेर की तरह साहसी है।
“फूल-सा कोमल” का प्रयोग करते हुए एक वाक्य बनाइए।
सा, सी, समान, जैसे और की तरह जैसे शब्द उपमा की पहचान में सहायक हो सकते हैं।
रूपक अलंकार की पहचान
रूपक में उपमेय और उपमान के बीच सीधा अभेद स्थापित किया जाता है। अर्थात किसी वस्तु को दूसरी वस्तु के समान न कहकर सीधे वही मान लिया जाता है।
जीवन एक यात्रा है।
वह मैदान का शेर है।
उपमा और रूपक में अंतर बताते हुए एक-एक उदाहरण लिखिए।
“वह शेर जैसा साहसी है” उपमा है, जबकि “वह शेर है” संदर्भ के अनुसार रूपक हो सकता है।
अनुप्रास अलंकार की पहचान
जब किसी पंक्ति या वाक्य में एक ही वर्ण या समान ध्वनि की आवृत्ति से विशेष ध्वनि-सौंदर्य उत्पन्न होता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार माना जाता है।
चंचल चिड़िया चहक रही है।
यहाँ “च” ध्वनि की आवृत्ति ध्यान आकर्षित करती है।
“म” ध्वनि की पुनरावृत्ति करते हुए एक छोटी काव्यात्मक पंक्ति बनाइए।
केवल किसी अक्षर का दो बार आ जाना पर्याप्त नहीं; पुनरावृत्ति से भाषा में विशेष ध्वनि-प्रभाव भी उत्पन्न होना चाहिए।
📖 साहित्यिक पठन और विश्लेषण
साहित्यिक पाठ में वातावरण की पहचान
वातावरण वह समग्र अनुभूति है जो स्थान, समय, मौसम, घटनाओं, वर्णन और शब्द-चयन के माध्यम से पाठक के मन में बनती है।
“सुनसान सड़क, घना अँधेरा और दूर से आती रहस्यमय आवाज़” किसी कहानी में भय या रहस्य का वातावरण बना सकते हैं।
किसी कहानी का एक अनुच्छेद चुनिए और उसमें निर्मित वातावरण बताने वाले पाँच शब्द या विवरण खोजिए।
वातावरण की पहचान के लिए पाठ से प्रमाण देना आवश्यक है।
लेखक के उद्देश्य की पहचान
लेखक किसी पाठ को सूचना देने, समझाने, मनोरंजन करने, प्रेरित करने, विचार व्यक्त करने या पाठक को किसी दृष्टिकोण के प्रति प्रभावित करने जैसे उद्देश्यों से लिख सकता है।
समाचार-रिपोर्ट — मुख्यतः सूचना देना
विज्ञापन — प्रभावित या प्रेरित करना
कहानी — मनोरंजन के साथ विचार या अनुभव व्यक्त करना
एक विज्ञापन और एक समाचार-पाठ चुनिए। दोनों के उद्देश्य की तुलना कीजिए।
एक पाठ के एक से अधिक उद्देश्य हो सकते हैं। निष्कर्ष को पाठ की भाषा और सामग्री से समर्थित करें।
दो पात्रों की तुलनात्मक समीक्षा
तुलनात्मक समीक्षा में दो पात्रों के गुण, उद्देश्य, व्यवहार, निर्णय, संघर्ष और विकास की समानताओं तथा भिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है।
स्वभाव • लक्ष्य • निर्णय • संबंध • संघर्ष • परिवर्तन
किसी कहानी के दो पात्र चुनिए और उनकी दो समानताएँ तथा दो भिन्नताएँ लिखिए। प्रत्येक के लिए पाठ से प्रमाण दीजिए।
तुलना केवल “अच्छा” और “बुरा” कहने तक सीमित न रखें। पात्रों के कार्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करें।
✍️ व्यावहारिक और रचनात्मक लेखन
साक्षात्कार लेखन
साक्षात्कार में किसी व्यक्ति से योजनाबद्ध प्रश्न पूछकर उसके अनुभव, विचार, ज्ञान या कार्य के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।
परिचय → व्यक्ति का संक्षिप्त परिचय
प्रश्न → स्पष्ट और विषय-संबंधी प्रश्न
उत्तर → उत्तरदाता की प्रतिक्रिया
समापन → धन्यवाद या निष्कर्ष
अपने विद्यालय के शिक्षक या पुस्तकालयाध्यक्ष के लिए 8–10 साक्षात्कार प्रश्न तैयार कीजिए।
प्रश्न स्पष्ट, सम्मानजनक और साक्षात्कार के उद्देश्य से संबंधित हों।
रिपोर्ट लेखन
रिपोर्ट किसी घटना, गतिविधि, सर्वेक्षण या परिस्थिति के बारे में तथ्यात्मक और व्यवस्थित जानकारी प्रस्तुत करती है।
शीर्षक
घटना/विषय का परिचय
समय और स्थान
मुख्य विवरण
महत्वपूर्ण परिणाम या निष्कर्ष
“विद्यालय में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी” पर 150–200 शब्दों की रिपोर्ट लिखिए।
रिपोर्ट में तथ्य, क्रम और स्पष्टता को प्राथमिकता दें।
विज्ञापन लेखन
विज्ञापन किसी वस्तु, सेवा, कार्यक्रम या संदेश की ओर लक्षित पाठकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए तैयार किया जाता है।
आकर्षक शीर्षक
मुख्य संदेश
महत्वपूर्ण विशेषताएँ
आवश्यक संपर्क या कार्यक्रम-विवरण
स्पष्ट आह्वान
विद्यालय में होने वाले “पुस्तक मेले” के लिए एक संक्षिप्त विज्ञापन तैयार कीजिए।
विज्ञापन आकर्षक हो सकता है, लेकिन उसमें दी गई जानकारी भ्रामक नहीं होनी चाहिए।
आत्मकथात्मक लेखन
आत्मकथात्मक लेखन में लेखक अपने जीवन, अनुभव, विचार और महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रथम पुरुष में वर्णन करता है।
परिचय → मैं कौन हूँ
पृष्ठभूमि → जीवन का संदर्भ
महत्वपूर्ण अनुभव → प्रमुख घटना
प्रभाव → उस अनुभव से आया परिवर्तन
चिंतन → मैंने क्या सीखा
“वह दिन जब मैंने कुछ महत्वपूर्ण सीखा” विषय पर 200 शब्दों का आत्मकथात्मक लेख लिखिए।
आत्मकथात्मक लेखन केवल घटनाओं की सूची नहीं है। अपने अनुभव, भावना और उससे मिली समझ को भी स्पष्ट करें।